Monday, May 5, 2014

नया-पुराना हिंदी लेखन

यूँ ही, हाल मे एक सज्जन टकरा गये। बात साहित्य की हो चली तो उन्होने हिंदी साहित्य के एक बड़े नाम, भगवती चरण वर्मा का जिक्र किया। मैं अब तक हिंदी के पढ़े साहित्य मे "राग दरबारी" और "गुनाहों का देवता" का ही नाम लेता चला आया था। हाल ही में निर्मल वर्मा के "अंतिम अरण्य" और "वे दिन" भी खरीदकर मैने पढ़ डाले थे जो मेरी पढ़े गये हिंदी नोवेल्स की लिस्ट मे दो नई प्रविष्टियाँ बनी थीं।
इन सज्जन से मिलने के बाद, कुछ ही दिन पहले, मैंने हिंदी के साहित्य मे गहरा ग़ोता लगाने का निश्चय किया।    इनकी अनुशंसा के मुताबिक भगवती चरण वर्मा कृत "चित्रलेखा" खरीदी और पहले ही दिन आधी पढ़ डाली।

हिंदी में नया और अच्छा साहित्य अब देख़ने को नहीं मिलता है। कुछ दिन पहले जब एक नयी प्रकाशित किताबों मे से एक मंगवायी तो उसे पढकर बड़ी निराशा हुई।  लेखन स्तर इतना गिर चुका है कि लोग कुछ भी लिख रहे हैं और प्रकाशित करा पा रहे हैं - हैरानी है। लगता है जैसे हिंदी के चेतन भगत की जगह खाली है और ये नये लेखक जैसे तैसे भागकर, तैरकर या उड़कर उस गददी पर विराजमान होना चाहते हैं।

हिंदी में अंग्रेजी और साथ ही अन्य भाषाओँ का सहित्य प्रकाशित होना बहुत अच्छी बात है लेकिन साथ ही मौलिक लेखन भी होना चाहिए। कहाँ से आयेंगे मौलिक लिखने वाले और उनको पढ़ेगा कौन?

विचार के साथ ही रुक जाता हूँ आज.…

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