Sunday, November 18, 2012

मेरा मोह!

आज मुझे क्यूँ ले जाते हो,
अभी अभी जीना सीखा है;
पहले अगर कभी ले जाते,
हल्का सा भी रंज न करता।

जीवन जीने की गफ़लत ने
इतने दिन था मुझे घुमाया;
आशाओं पे परत दर परत
शंकाओं की धूल आ जमी।

आज कहीं से हल्की हल्की
जी लेने की चाह है उभरी;
इतने दिन था जिया छदम में,
ज्यों जीवन मुझे आज मिला हो।

मेरी बेटी हाथ पकड़कर
मुझसे बातें बहुत है करती;
मुझको ज्ञानपुंज मानकर
जाने क्या क्या बतियाती है।

सरल बाल प्यारी बातों में
रहकर शेष न कुछ चाहत है;
रोकूँ समय प्रवाह किस तरह,
मेरे डर मुझको चेताते।

आज मुझे क्यूँ ले जाते हो,
अभी अभी जीना सीखा है;
पहले अगर कभी ले जाते,
हल्का सा भी रंज न करता।





 

Sunday, November 11, 2012

वाल्ट व्हिटमैन की कविता "Song Of My life" का एक रोचक अंश


कभी मैं सोचूं  कि बस ही जाऊं पशुओं के बीच, सौम्यता और संतोष से भरे,
देर तलक ताकता रहता हूँ उनको यूँ ही।


वे न अपने हालातों का रोना रोते हैं, और न ही अपनी किसी पुरानी बात पर रोते हुए रात ज़ाया करते हैं,

और न ही अपनी ईश-भक्ति के दिखावे पर कोई बहस छेड़कर मुझे परेशान करते हैं ,

न जीवन के प्रति उनमे कोई असंतोष है और न ही चीज़ों को हासिल करते जाने का उन्माद है छाया,

न  कोई पशु किसी अन्य पशु के सम्मुख झुकता है और न ही किसी हज़ार साल पहले जन्मे पशु के सम्मुख,

उनमे कोई ख़ास आदरणीय कहलाये, ऐसा भी नहीं, और न ही कोई उदास पशु मिलेगा इस जग में।

Hindi Translation - Part-32 of "Song of My Life" by Walt Whitman.

Wednesday, November 7, 2012

Self Expression is a function of responsibility - Werner Erhard

“Happiness is a function of accepting what is. Love is a function of communication. Health is a function of participation. Self expression is a function of responsibility.”

http://wernererhardquotes.wordpress.com/