Monday, June 4, 2012

मेडीटेशंस - तृतीय अध्याय (किश्त - 3)

हिप्पोक्रेटस ने बहुत से लोगों की बीमारियों का इलाज़ किया और अंत में स्वयं किसी बीमारी से ही मरा. कील्डियन ज्योतिषियों (16 सदी इसवी पूर्व के बेबीलोन के ज्योतिषी) ने बहुतों के मरने की भविष्यवाणियाँ कीं लेकिन बाद में अपनी किस्मत में लिखी मौत के आगोश में समा गए. सिकंदर, पोम्पे, जुलिअस सीज़र ने तमाम शहरों को बार-बार नेस्तनाबूद किया और बहुत सी लड़ाईयों में हजारों-लाखों लोगों और घोड़ों को मौत के घाट उतारा लेकिन अंत में अपना समय आने पर उनको भी इस संसार से रुखसत होना पड़ा. हेराक्लिट्स ने पहले ही कहा था की विश्व विध्वंसक आग से समाप्त होगा, लेकिन वह स्वयं शरीर में पानी भरने के रोग से मरा और तब गोबर की पुल्टिस उसके तन पर लगी हुयी थीं.दरिंदों ने डेमोक्रीतुस को मारा, किन्ही और दरिंदों ने सुकरात को. इस सबसे क्या सीख मिलती है? पहले कुछ करने का प्रण करो, फिर समुद्री यात्रा पर निकलो, बंदरगाह जा पहुँचो, फिर किनारे पर चढ़ चलो (मृत्यु). यदि यह दूसरा जीवन है तो हर जगह ईश्वर है, उधर भी है. और अगर इसे असंवेदनशीलता कहें, तो तुम्हें दर्द या आनंद का आभास होना बंद हो ही चुका होगा, तुम शरीर के गुलाम न रह गए होगे, जो एक ख़राब स्वामी किन्तु बेहतरीन सेवक जैसा है. एक मन और दिव्यता है तो दूसरा धूल और लहू से गुंथी मिटटी.

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क्रमशः

इस पुस्तक के कुछ और इंग्लिश अनुवादों में से एक का लिंक

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