Wednesday, October 28, 2009

मेडीटेशंस - प्रथम अध्याय (किश्त - ७)

विलासिता की वस्तुएं मेरे पिताजी के पास प्रचुर मात्रा में थीं, उनका उपयोग वे घमंड या आत्म ग्लानी के बिना करते थे; उन वस्तुओं का होना या न होना उन्हें प्रसन्न या निराश न करता था। कोई भी उनको फरेबी या ठग या ज्ञान का दंभ भरने वाला न कहता था, सभी के अनुसार वे समय के साथ प्राप्त अनुभवों के स्वामी और समझदार इंसान थे जो चापलूसी से परे था और न केवल अपने बल्कि दूसरों के भी जीवन की गतिविधियों का नियंत्रण कर सकता था।

मंजे हुए दार्शनिकों का वे सम्मान करते थे, ऐसा नहीं की कच्चे या फर्जी दार्शनिकों का उन्होंने अपमान कर डाला हो पर उनको आसानी से भांप लेते थे वो।

आसानी से लोगों में घुल मिल जाने वाले, हास्य में निपुण किंतु उसकी नकारात्मक अधिकता की पहचान रखने वाले।

अपने शरीर का बड़ा ध्यान रखते थे वो, ऐसा नहीं की जीवन से बहुत मोह हो उन्हें, किंतु व्यक्तिगत छवि का ख्याल वे जरूर करते थे और उसमें लापरवाही नहीं करते थे। इसी कारण डाक्टरों या दवाओं का उनको मोहताज़ न होना पड़ा था।
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क्रमशः

Sunday, October 18, 2009

ताओ-ते-चिंग की शिक्षाएं

ताओ-ते-चिंग, छठी शताब्दी ईसा पूर्व (6th Century BC) चीन में "लाओ त्जु " यानी वृद्ध/अनुभवी अध्यापक द्वारा लिखी गई शिक्षाप्रद बातों का संकलन है।
यह शिक्षाएं कितनी रोचक तथा आज भी कितनी प्रासंगिक है इसकी बानगी देखिये:

"यदि आप प्रतिभावान लोगों का बहुत ज्यादा महिमामंडन करेंगे
तो लोगों में प्रतिस्पर्धा बढ़ जायेगी।
यदि आप वस्तु संग्रह को अत्यधिक बढ़ावा देंगे तो
लोग चोरी की हद तक उतर आयेंगे। "

"लोगों का सुन्दरता को अलग करके देख पाना ही गंदगी का जन्मदाता है।
किसी को अच्छा कहने से बुरे की रचना अपने आप ही हो जाती है।"

इस रोचक और साथ ही साथ छोटी सी पुस्तक को पढने के लिए क्लिक करें। यहाँ इस पुस्तक का इंग्लिश अनुवाद दिया है। स्वयं इस पुस्तक का हिन्दी अनुवाद प्रस्तुत करने की इच्छा तो है किंतु ऐसा करना जल्दी सम्भव नहीं। आशा है ब्लोग्वानी से कुछ मित्र इस यज्ञ में साथ देंगे।
इसके लिए अन्य लिंक्स विकिपीडिया से जुटाए जा सकते हैं।

Tuesday, October 13, 2009

Car Servicing - Go "CARNATION"

Recently when I thought of getting my car serviced, I contacted a friend who owns the similar car, about the nearest authorized service center. He suggested a nearby Maruti service center but I could not really understand the location of it as I am not very much familiar with this new area I 've shifted into.

Whether it was the inability to get the location of the service center or my occasional (perpetual) habit of postponing things. Let me defend myself by saying that I postpone only the "not-so-important" tasks in order to get the tasks of higher priority be executed first. So I did not approach the service center. The idea of getting the car serviced stayed on my to-do list for quite a while and then faded away.

Just three days back it clicked to me to list the areas of life I am not showing willingness to be responsible and take action - the areas where resistance is beating me up and to my surprise the car servicing was the first job in that list. I promised myself that the car would be serviced by tommorrow evening, come what may. That evening I found this new company Carnation that is being promoted by the ex-chairman of the Maruti Udyog Limited, Mr. Jagdish Kattar.

Next morning at 9:15 AM, I was talking to the service manager of the Carnation in their premises. What I liked about Carnation in comparison to any Maruti service center is that they are equally well equipped and well trained but due to they being in the nascent stage and thus being less popular they have very few customers and that is why they treat one well and they spend time with the vehicle.

Though their charges are similar to Maruti's but the customer focus seems to be better here.

So where are you getting your car serviced next...?

Download the original attachment
Copying and pasting a formula in Excel


Did you ever copy a formula from a cell to some other cell(s) in MS-Excel…if yes then this copy paste must have confused some of the readers? In this article, I am explaining how the formula copy/paste works.


Let’s remember the rule of thumb

“When we copy/paste a formula, the formula cell references change relative to the current (active) cell, on the other hand we cut/paste a formula; the formula remains the same in the new destination.”



Learning how the formula cell references change when copied to other cells:

First goto the Tools->Options->View and check the formula check box. It displays the formula in a cell instead of its value.


Write a formula “=A1” in any cell and copy and paste it in a 3x3 grid of cells irrespective of their column and rows (either by manually or by drag-drop).


Scenario #1




=A1 =B1 =C1
=A2 =B2 =C2
=A3 =B3 =C3



Notice that the simple formula changes from A1 to A2,A3 and so on in the different rows while to B1,C1 in the different columns and similarly in other cells as shown in the attached grid.

This is known as relative cell referencing.


Scenario #2


=$A1 =$A1 =$A1
=$A2 =$A2 =$A2
=$A3 =$A3 =$A3



Notice that the simple formula remains A1 when copied in different columns but changes to A2, A3 in the different rows and similarly in other cells as shown in the attached grid.


OR


=A$1 =B$1 =C$1
=A$1 =B$1 =C$1
=A$1 =B$1 =C$1



Notice that the simple formula remains A1 when copied in different rows in the same column but changes to B1, C1 in the different rows and similarly in other cells as shown in the attached grid.


This is known as mixed referencing.



Scenario #3
=$A$1 =$A$1 =$A$1
=$A$1 =$A$1 =$A$1
=$A$1 =$A$1 =$A$1



Notice that the formula remains same across the gird.


This is known as absolute referencing.



Examples:

Name BasicSalary HRA NetSalary
Amit 1000 =B2*0.1 =B2+C2
Ajit 2000 =B3*0.1 =B3+C3
Sarita 3000 =B4*0.1 =B4+C4
Yogesh 4000 =B5*0.1 =B5+C5



Produces


Name BasicSalary HRA NetSalary
Amit 1000 100 1100
Ajit 2000 200 2200
Sarita 3000 300 3300
Yogesh 4000 400 4400



To better the previous example, we may write:


TaxRate 0.1

Name BasicSalary HRA NetSalary
Amit 1000 =B5*B2 =B5+C5
Ajit 2000 =B6*B3 =B6+C6
Sarita 3000 =B7*B4 =B7+C7
Yogesh 4000 =B8*B5 =B8+C8



That produces the following output:

TaxRate 0.1

Name BasicSalary HRA NetSalary
Amit 1000 100 1100
Ajit 2000 0 2000
Sarita 3000 #VALUE! #VALUE!
Yogesh 4000 4000000 4004000




Reason for producing the wrong results:


Relative cell reference for rate B2 did change to B3 ,B4 and so on and thus the formula produces wrong / unexpected output.


Solution:


To change the relative reference B2 to absolute reference $B$2 so that it produces the desired result as the following:



TaxRate 0.1

Name BasicSalary HRA NetSalary
Amit 1000 =B5*$B$2 =B5+C5
Ajit 2000 =B6*$B$2 =B6+C6
Sarita 3000 =B7*$B$2 =B7+C7
Yogesh 4000 =B8*$B$2 =B8+C8





TaxRate 0.1

Name BasicSalary HRA NetSalary
Amit 1000 100 1100
Ajit 2000 200 2200
Sarita 3000 300 3300
Yogesh 4000 400 4400



Hope this article clarifies the doubts on Relative & Absolute cell referencing.


Now try the following exercise to understand the mixed referencing and for answers, you can mail me.

Exercise:


Produce the following grid by writing the bold data yourself and a formula in place of the underlined text and fill the other cells by copy/paste of the formula.

1 2 3
1 1 2 3
2 2 4 6
3 3 6 9


Saturday, October 3, 2009

मेडीटेशंस - प्रथम अध्याय (किश्त - ६)

१६ अपने पिता में मैंने सीखा: नम्र स्वभाव, पूरे सोच विचार के बाद लिए गए निर्णयों के साथ अडिग होकर खड़े रहना; तरह तरह के सम्मानों, तारीफों व दिखावों में तनिक रूचि न रखना; मेहनत व कभी हार न मानने वाला जुझारूपन; हमेशा ऐसी बात सुनने को समय देना व तैयार रहना जिससे सबका भला होता हो; पक्षपात रहित प्रोत्साहन, सबको उनकी योग्यता के हिसाब से उनका पारितोषिक देना; कब सख्ती व कब नरमी से काम लेना चाहिए ऐसा उन्होंने अपने अनुभव से भली भांति जान लिया था;
समलिंगी प्रेम पर उन्होंने रोक लगायी थी। अपने को किसी अन्य सामान्य व्यक्ति जैसा ही मानना उनकी खूबी थी; अपने अधीनस्थ लोगों को उन्होंने रात के खाने पर अपने साथ होने की मजबूरी से मुक्त कर दिया था और साथ ही अपने शहर से बाहर के दौरों पर भी उन सबकी उपस्थिति की अनिवार्यता भी खत्म कर दी थी। कोई अगर अपनी मजबूरी के कारण से उनके साथ न जा पाता था उसे भी उनके व्यवहार में कोई भेद नहीं मिलता था। बैठकों में उनके विचारों में स्पष्टता व दृढ़ता होती थी, पहली नज़र में ही किसी चीज़ या बात से संतुष्ट हो जाने वालों में वे न थे, सवालों को पूर्ण रूप से उत्तर मिलने या देने से पहले वे उसे छोड़ते न थे। मित्रों के प्रति उनकी वफादारी किसी भी चपलता या दिखावे से परे थी। उनका संतुष्ट तथा खुशमिजाज़ व्यक्तित्व का स्वामी होना, दूरदर्शिता के साथ साथ छोटी से छोटी बात पर नज़र, सच्ची तारीफ़ व चाटुकारिता में भेद कर पाना, राज्य सञ्चालन की आवश्यकताओं का ध्यान रखना, व्यय का अच्छा हिसाब किताब रख पाने की क्षमता , इन सभी कार्यों के संपादन में कुछ लोगों द्वारा की जा रही अपनी आलोचनाओं सह पाने की क्षमता; ईश्वर से अंधविश्वासों के कारण डरना उनमें न था, न ही वे किसी को उपहारों या खुशामद से अपने पक्ष में लाते थे, अपितु उनका तरीका सहज सा था।
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क्रमशः

Friday, October 2, 2009

मेडीटेशंस - प्रथम अध्याय ( किश्त - ५ )

१३ केटालुस से सीखा कि : किसी भी मित्र द्वारा की गई आलोचना को नकारा जाए, भले ही वह आलोचना कितनीभी बेतुकी (unreasonable) जान पड़े; बल्कि उस मित्र को प्रयासों द्वारा पुनः उसके सामान्यतः किए जाने वालेव्यवहार में लौटा लाना चाहिए। ये भी सीखा कि अपने किसी से भी अपने अध्यापकों का जिक्र, दिल से कृतज्ञताजताते हुए करना चाहिए जैसा कि डोमितिअस और अथेनोदोतुस के लिखे विवरणों में संकलित है। साथ ही सीखाबच्चों के प्रति सच्चा प्यार भी।

१४ मेरे भाई सेवेरस से मैंने सीखा कि : परिवार को प्यार करना, सत्य को प्यार करना, न्याय को प्यार करना; उसीकी मदद से मैं थ्रासिया, हेल्विदिअस, केटो, दियो ब्रूटस को समझ पाया। उसी से मुझे ये समझ आया कि एकसंतुलित संविधान (Government) कैसा होना चाहिए, एक राज्य जिसके सभी लोगों को सामान अधिकार हों तथावे लोग अपनी बात कहने का अधिकार रखते हों। जहाँ का राजतन्त्र (Monarchy) अपनी प्रजा की स्वतंत्रता कोवरीयता देता हो।
उससे भी मुझको, दर्शन शास्त्र को एक सतत तथा उच्च कोटि का आदर देने का ज्ञान मिला और साथ ही मैंने उससेसीखा - अस्वार्थी होना, उदार दानी होना, आशावादी होना, मित्रों के प्रेम में विश्वास, अपने विचारों को व्यक्त करनेमें खुलापन / दक्षता - चाहे वे किसी को पसंद भी हों, अपनी पसंद - नापसंद को कह देना जिससे उसके मित्रों कोउसकी मर्जी के बारे में सिर्फ़ अनुमानों पर निर्भर रहने पड़े।

१५ मेक्सिमस् से मैंने सीखा: स्वयं का स्वामी होना (Self Mastery), किसी भी आवेग में आकर निर्णय लेने केदुर्गुण से दूर, सभी परिस्थितियों में प्रसन्न बने रहना - चाहे वे बीमारियाँ ही क्यों हों। चरित्र में एक जबरदस्तसंतुलन - सहज और साथ ही साथ शानदार। जो भी कार्य किया ही जाना है उसके प्रति गैर शिकायती बने रहकरअपनी शक्तियों को उसके संपादन में लगाना। वो सभी में जो एक भरोसा जगा डालता था कि वो जो कह रहा है वैसेही उसके कर्म भी होंगे - शब्द कर्म में सामंजस्य; वो जो भी करता था उसके पीछे उसकी भावना बड़ी ही भद्र होतीथी। उसने कभी भी आश्चर्य या चौंक जाने का प्रदर्शन नहीं किया, ही कभी जल्दबाजी या हिचकिचाहट दिखलाई,
ही कभी किसी काम को टाला, कभी हताशा या पीछे हटने की बात की, ही गुस्सा या गैर-भरोसे कि बातों मेंअटका। भलाई के कामों में लगना, सच्चा तथा क्षमा कर देने वाला व्यक्तित्व; वो ऐसा व्यक्ति था जिसको सही-ग़लतकी समझ ख़ुद ही थी कि वो ऐसा करने को मजबूर था। कोई भी ये नहीं कह सकता था कि मेक्सिमस् ने उसकोनीचा दिखलाया या ख़ुद को उनसे बेहतर मानता रहा। सबको पसंद आने वाले हास्य को वो बढावा देता था।


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क्रमशः