Saturday, May 30, 2009

The religious teachings - basis of living your life

The education makes living life a lot easier. The religious education, any religion it may be, directly address the life related issues. It educates on life itself, a level of education far above than learning the know how of a technical topic. Issues related to daily life, relationships, finances and business, wisdom, morality, and many other aspects of a human life are addressed by religious teachings.

Whosoever has written them, they made it sure that the common men can understand and execute their lives accordingly. The Bhagvad Gita, the Mahabharata, the Ramayana, the Koran, the Bible, the jataka tales and many other such works have directly or indirectly addressed the questions related to conducting one's life.

The stories from the religious books, religious serials for the new generations surely affect some or the other decision we make in life.

Today we are living in a market governed economy, and we are growing up for the first time for sure ;-), many questions we are facing for the firts time. Right-wrong, ability-inability, morality-immorality...such vicious circle deprives us of the moment of life we are living in. Every question or problem of living can be related to some or the other religious teaching, including global warming.

If we base our lives on the religious teachings and strategies suggested by them, we base our lives on the collctive knowledge of thousand years of the human kind. It is very simple to understand from this example - we wear a shirt, to evolve into its present form, it must have taken thousands of years. Similarly religious teachings have been in place for many years and they offer a kind of "optimized way of living". Here I definitely do not mean that following religious teachings is equivalent to being spiritual, whih would anyway is a different matter as well as a choice.

I simply mean learning emotional intelligence from this way of living. Its a major parameter of success in today's world, specially in a service industry like India.
Emotinal intelligence deals with a human beings ability to conduct relationships and his/her reactions and responses in various life conditions.

In a way, religious teachings provide the easiest and the cheapest way of learning emotional intelligence.

Gautam buddha, like many other grwat human beings, have discovered a lot if such knowledge related to the problems of living and he shared it with the people out of compassion.


I am starting a new blog at http:\\thetenthstate.blogspot.com, to share and discuss the recent learnings being in buddhism.

I am sure that the article here would add value to you.

जीवन का आधार धार्मिक शिक्षा द्वारा बनाया जाना चाहिए

शिक्षा मानव जीवन को बहुत आसान बना डालती है। धार्मिक शिक्षा, चाहे वो कोई भी धर्म हो, सबसे सुलभ और सीधे जीवन से जुड़ी होती है। विषयों के ज्ञान से कहीं आगे जीवन जीने का ज्ञान देती हैं ये धार्मिक शिक्षाएं। जीवन का हर पहलू - दैनिक जीवन यापन, रिश्ते, पारिवारिक जीवन, व्यापार, समझदारी, नेतिकता और अन्य तमाम पक्षों को छूती हैं ये शिक्षाएं। लिखने वालों ने बहुत सारे उपस्थित ज्ञान को बहुत आसान बनाकर सामान्य जन के हित में प्रस्तुत किया होता है वहां। कोई भी धार्मिक ग्रन्थ - गीता, महाभारत, रामायण, कुरान, बाइबल, जातक कथायें तथा और भी बहुत से ग्रंथो ने जीवन यापन के बहुत सारे प्रश्नों का ही तो उत्तर प्रस्तुत किया है।

बचपन में पढ़ी गई धार्मिक कहानियों, नई पीढी के लिए धारावाहिकों ने भी, बहुत से निर्णयों को किसी न किसी मोड़ पर प्रभावित किया ही है।

आज जब व्यापारोंमुखी अर्थव्यवस्था में हम लोग रह रहे हैं, और निश्चय ही हम तो पहली ही बार बड़े हो रहे है, बहुत से नए प्रश्न आ खड़े हुए हैं हमारे सामने। सही-ग़लत, काबिलियत-नाकाबिलियत, नेतिक-अनेतिक - सवालों के चक्रव्यूह में जीवन का क्षण स्वाहा हो जाता है। जीवन के हर प्रश्न को इससे जोड़ा जा सकता है, यहाँ तक कि ग्लोबल वार्मिंग को भी।

धार्मिक शिक्षाओं और उनके द्वारा स्थापित जीवन कि रणनीति को जीवन में लाने से हम हजारों-लाखों वर्षों के ज्ञान को अपने जीवन जीने का आधार बना सकते हैं। अब ये कुछ ऐसे ही है जैसे कि कपड़ा पहनना। यूँ देखिये कि एक कमीज़ जो हम पहनते हैं उसके आज तक के विकास में हजारों-लाखों साल लगे होंगे। ठीक ऐसे ही धार्मिक शिक्षाएं भी हजारों-लाखों सालों में जाकर स्थापित "ओपटीमाइज़ड" जीवन शैली को प्रस्तुत करती हैं। यहाँ मेरा धार्मिक शिक्षाओं से तात्पर्य आध्यात्मिक होना बिल्कुल नहीं है जो इसी सिक्के का दूसरा पहलू होगा।
मेरा सीधा मतलब इमोशनल इंटेलिजेंस से है जो आज जीवन में सफल होने का एक बड़ा कारक है। इमोशनल इंटेलिजेंस - जिसमे एक इन्सान को किसी तकनीकी ज्ञान नहीं वरन बाकि इंसानों से रिश्ता निभाना, विभिन्न परिस्थितियों में उसकी प्रतिक्रया का अध्ययन किया जाता है।
देखा जाए तो हर धर्म कि शिक्षाएं इमोशनल इंटेलिजेंस सीखने का सबसे आसान और सस्ता तरीका होती हैं।
बहुत से अन्य महानुभावों कि भांति गौतम बुद्ध ने भी हजारों वर्षों पहले ऐसा ही महत्वपूर्ण ज्ञान खोज कर, करुणा वश उसको सब लोगों तक पहुँचने का काम किया था।

मैं भी अपनी अपनी हालिया सीखी और "इन प्रोसेस" बोधः शिक्षाओं पर आधारित नया ब्लॉग शुरू कर रहा हूँ।
आशा है कि इसके लेख आपको रोचक लगेंगे।

http:\\thetenthstate.blogspot.com

Monday, May 4, 2009

मनीष से किया वादा पूरा हुआ - कहानी छाप चुका हूँ उसके लिए

मनीष से वादा कर लिया था - कहानी तो लिखनी ही है, बोला था मनीष। पूरा ही पिंजर तैयार किया मनीष ने, मैंने भी उसका इशारा पाते ही रंग भर दिए।
मनीष योग सिखाते हैं और मैं एक टेलिकॉम कंपनी में तकनीकी विषयों के शिक्षा से जुड़ा हूँ। कहानी लेखन से दोनों के कार्य क्षेत्र का जुडाव नहीं है। दोनों ही "आत्म ज्ञान" पर व्यक्तिगत शोध करते हुए टकरा गए और किसी क्षण ये वादा हो गया कि नए कुछ नया ज्ञान जो इकट्ठा किया है उसे एक कहानी का रूप दे दें। जिस मूल रूप में कहानी बन पड़ी वोह ही छाप दी है।

कहानी पढने के लिए क्लिक करें