Saturday, April 25, 2009

ये दिल्ली है मेरे यार...


दिल्ली प्रतीक है...

उन उत्तेजनाओं की -

निर्माण किया जिन्होंने इसका;
उन संतुष्टियों की -
सहेजा हमारे लिए जिन्होंने इसको;
उन शक्तियों की -
देश चलाती हैं जो;

उन् मेधाओं की -
भविष्य की कुंजियाँ हैं जो;
उन घमंडों की -
बोझ होने पर भी लादे है जिनको;
उन दुखो की -
सहा है जिनको इसने;
उन हसरतों की -
जिन्हें पूरा करती है ये, कुछ रह भी जाती हैं अधूरी;
उस गरीबी की -
करुणा है जिसके लिए इसमें;
उस अमीरी की -
आशा के साथ दूर से ही देखा जिसको;
दिल्ली प्रतीक है ...

Picture Courtsey : www.wikipedia.com

बचपन और परिपक्वता (Childhood vs Maturity)


प्यारे बच्चे...
(O sweet little toddler...)

देख तुझे मैं खुश भी हूँ और उदास भी;
(Seeing you makes me filled with hope then I feel a little disheartened too)

खुशी
है कि तू जन्मा, जीवित भी है तू अभी;
(I am happy that you have arrived in this world and also that you are alive now)

प्रकृति
भी है साक्षी तेरे कोमल जीवन कि;
(The mother nature is also a silent spectator of your tender blissful life)

समझौतों से रह बेखबर, विश्व के स्पंदन का अंग हो तुम;
(Unaware of many of the agreements that run an adult life, you are a part of the world's heartbeat)

स्फुटित होता है उच्च कोटि का जीवन तुमसे;
(you display the life of the highest state)

तुमसे ही जीवन की सम्भावना पाती है मानव की जात;
(you show a possibility of "living" to the human race)

अब यहाँ से आगे की जब कल्पना भी करता हूँ मैं;
(When I think about the life you might be living in the days to come)

मन ही मन प्रार्थना करने लगता हूँ तेरे लिए मैं;
(I silently pray for you to be strong to face the harsh realities lying ahead for you)

अब से आगे जो प्रतिरोध स्वरुप जीवन विकसित होगा;
(As the life ahead you 'll have would born out of your resistances you meet)

प्रकृति के विरुद्ध तुझको अड़ा जो देगा;
(You will be at loggerheads with the forces of the nature)

जाने अनजाने तू जो विषाद का निर्माण करेगा;
(Knowingly or unknowingly, you would create pain and suffering for yourself)

शोक और कलेश में जो जीवन बीतेगा;
(The life might see its share of sorrows and sadness)

तेरे सपने और अब उपस्थित दैवीय गुण सब लुप्त प्राय से होंगे;
(The dreams and the divine qualities you have now, would simply disappear)

नाम इस विकास का परिपक्वता होगा;
(We, in this world, call it maturity!)

Tuesday, April 21, 2009

The Game

Game : General Definition
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A game is a structured activity, usually undertaken for enjoyment and sometimes used as an educational tool. Games are distinct from work, which is usually carried out for remuneration, and from art, which is more concerned with the expression of ideas. However, the distinction is not clear-cut, and many games are also considered to be work (such as professional players of spectator sports/games) or art (such as jigsaw puzzles or games involving an artistic layout such as Mah-jongg solitaire).

Key components of games are goals, rules, challenge, and interaction. Games generally involve mental or physical stimulation, and often both. Many games help develop practical skills, serve as a form of exercise, or otherwise perform an educational, simulational or psychological role. According to Chris Crawford, the requirement for player interaction puts activities such as jigsaw puzzles and solitaire "games" into the category of puzzles rather than games.



Game : Definition in Transactional Analysis
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A game is a series of transactions that is complementary (reciprocal), ulterior, and proceeds towards a predictable outcome. Games are often characterized by a switch in roles of players towards the end. Games are usually played by Parent, Adult and Child ego states, and games usually have a fixed number of players; however, an individual's role can shift, and people can play multiple roles.

Berne identified dozens of games, noting that, regardless of when, where or by whom they were played, each game tended towards very similar structures in how many players or roles were involved, the rules of the game, and the game's goals.

Each game has a payoff for those playing it, such as the aim of earning sympathy, satisfaction, vindication, or some other emotion that usually reinforces the life script. The antithesis of a game, that is, the way to break it, lies in discovering how to deprive the actors of their payoff.

Students of transactional analysis have discovered that people who are accustomed to a game are willing to play it even as a different "actor" from what they originally were.
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Source: www.wikipedia.com
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Thursday, April 16, 2009

Aabida - A Short Story finds its place on TECHMATE

Today one of my stories, which have so far been published on this blog only, appeared on "TECHMATE".

"TECHMATE" is an intranet web site for publishing the creative text from its employees within Tech Mahindra Ltd.

Creative "khujli" joron se ho rahi hai...

Tuesday, April 14, 2009

एक कहानी

"पहुंचकर फ़ोन कर देंगे", उदात्त ने कार में बैठते हुए कहा। जब कर आगे बढ़ी तो ड्राईवर की सीट पर उदात्त, बगल में उदात्त के बड़े भाई विनोद और पिछली सीट पर उदात्त की पत्नी सुमति बैठी थी। चलते चलते गाड़ी को विदा करने पूरी की पूरी भीड़ खड़ी थी - उदात्त की माँ, गांव के सभी रिश्तेदार और नया दूल्हा अजीत भी जो उदात्त का चचेरा भाई था।

अजीत कि शादी के बाद वर-वधु को लेकर आने की जिम्मेदारी उदात्त को सौंपी गई थी। वर वधु को कुशल पूर्वक गांव तक लाकर उदात्त अगले ही दिन वापिस शहर लौटने की तैयारी कर चुका था।

गांव से विदा लेकर तीनों कुछ ही देर में कसबे को मुख्य हाई वे से जोड़ने वाली सड़क पर जा पहुंचे। गाड़ी की रफ़्तार ठीक ठाक ही थी। तीनो ही अपनी अपनी सोच में डूबे थे। उदात्त की सोच एक बेहतर कार ले लेने की थी। विनोद को शीघ्र घर पहुँचने और अपने बचे खुचे काम पूरे करने की धुन थी। सुमति उस विवाह में देखे गए आभूषणों और वस्त्रों को पुनः याद कर आनंदमग्न थी।

एक ट्रक से आगे निकलने की कोशिश में उदात्त ने अपनी गाड़ी की रफ़्तार बढ़ा ली। इसी समय ट्रक ड्राईवर ने भी थोड़ा दांयें अपना ट्रक घुमाया, सामने से आती दूसरी कार को बचाने की कोशिश की थी उसने। सामने से आती कार तो बच गई पर ट्रक अपने दांयें से आगे बढती उदात की कार से टकरा गया। उदात्त ने जल्दी ही खतरा महसूस कर के गाड़ी तेजी से अपने और दांयें घुमाई और तेजी से ब्रेक लगाकर किनारे की और गाड़ी को काटा। उदात्त का गाड़ी चलाने का अनुभव काम आया और अंदर बैठी तीनों जाने सुरक्षित रहीं; उसकी कार के दाहिने हिस्से को जरूर नुक्सान पहुँचा। गाड़ी की टक्कर और तीनों प्राणियों के अपने आप को सुरक्षित पाने की निश्चितता के बीच कुछ पल भर का ही फासला था।

सारी औपचारिकताओं को घटनास्थल पर पूरा कर उदात्त आगे बढ़ चला। सभी को सुरक्षित पा कर आपस में सभी ने खुशी जताई और भगवान को धन्यवाद् दिया।

सारे रास्ते उदात्त अपने ड्राइविंग कौशल को सवाल करता रहा। उस चूक से आइन्दा बचने के तरीकों कोमन ही मन जैसे इजाद करने लग पड़ा था वो। सुमति सारे रास्ते अपनी अब तक की गई पूजा पाठों का धन्यवाद देने में लगी हुई थी। ईश्वर ने उस भक्ति का परिणाम आज सबकी जान बख्श कर दे दिया - सुमति को गहरा भरोसा था इस बात पर। विनोद भी अपने ही ख्यालों में व्यस्त था। उदात्त को बहुत सी सीख यहीं दे डाले ऐसी उसकी तीव्र इच्छा हो रही थी। अब एक बड़े भाई का अपने छोटे भाई से जुडाव कुछ ऐसा ही तो होता है। जग के सारे बड़े भाई अपने से छोटों के लिए अपनी जिम्मेदारी का प्रदर्शन करते हुए कुछ आक्रामक तो हो ही जाते हैं। ऐसी ही आक्रामक होने की तीव्र इच्छा को दबाने की कोशिश में विनोद। हालाँकि इस इच्छा का विरोध उसे चिडचिडाहत से भी भर रहा है। ऐसी मनोदशा में विनोद को रह रहकर ट्रक ड्राईवर, उदात्त, अपने माँ-बाप, अपने पूर्व अध्यापकों, अपने सहकर्मियों, पड़ोसियों और यहाँ तक की अपनी पत्नी और बच्चे पर भी गुस्सा आता जा रहा है। ये सोच विचार प्रतीत होता है की मानो कुछ समाधान पाने कि आशा से किया जा रहा हो, पर अभी इस क्षण में तो ये विनोद की मजबूरी बन चुका है - पर समाधान है कि कभी प्रकट होने का नाम नहीं लेता। उदात्त को भी इस तरह का आदतन सोच विचार अपने नियंत्रण में लिए हुए है, पर उदात्त को इसकी उपस्थिति का अहसास है। जान चुका है वो इन ताकतवर किंतु स्वयं को हराने वाले विचारों के उमड़ते हुए बादलों का. इसी समय उसने गुरु के ज्ञान को मन ही मन दुहराना शुरू कर दिया है।
गुरु, जिसने कभी उसे बताया था कि कोई घटना और उस घटना का विवरण दोनों बिल्कुल अलग अलग बातें होती है और हम में से अधिकतर इंसान उन्हें एक करके देखते हैं। बहुत से वैचारिक विपदाओं का जन्मदाता यही चक्र तो है।

ज्ञान के इस दुहराव ने उदात्त को तुंरत विचारों के चंगुल से मुक्त कर दिया और तुंरत पुरानी मुक्तिकारक अनुभूतियों से जोड़ दिया । उदात्त ने तुंरत ये बातें विनोद और सुमति को भी बताईं। उन पर इस तात्कालिक अर्जित ज्ञान का कोई असर होता नहीं दिखा।
ज्ञान और अनुभूति (experience) दोनों ही बिल्कुल अलग तरह की होती हैं। जिन्दगी का निर्वाह ज्ञान से ज्यादा अनुभूति से नियंत्रित होता है।

सभी ने आने वाले कुछ ही घंटों में अपने अपने तरीकों से अपनी मानसिक यंत्रणाओं को काबू कर लिया। किंतु विनोद और सुमति के लिए ये अनुभव सिर्फ़ एक याद से कहीं ज्यादा था। जीवन भर ऐसी घटना से बचने की सीख और साथ ही ये कहानी भी वो अपने इर्द गिर्द के लोगों को जरूर देते रहेंगे।

घर लौटकर जब गांव फ़ोन किया तो माँ के आगे ये बात निकल ही गई। माँ हैरान परेशान सी सवाल डर सवाल पूछती चली गई। शायद कोई भुत या प्रेत गांव से ही साथ हो लिया होगा, माँ ने सोचा। घटना के साथ हम कैसे अपने अनुभव से कोई एक कहानी झट से चिपका देते हैं हम - उदात्त ने सोचा। ये कहानी ही तो हमारी सच्चाई बन जाती है सारी उमर के लिए। घटना तो सिर्फ़ एक घटना भर ही होती है न - और सच्चाई सिर्फ़ और सिर्फ़ हमारी सच्चाई, जिससे हम उस घटना को देखते हैं। इस कहानी या हमारी सच्चाई का अस्तित्व वहां कहीं बाहर न होका हमारे मन मस्तिषक में होता है जिससे हम अपने निकट के सभी लोगों को प्रभावित कर डालते हैं।

माँ ही नहीं, यह घटना गांव या शहर के उदात के पड़ोसियों, जिसको भी पता चली सभी ने अपने अपने तरीके से उसके कारण और अपने साथ ऐसा न हो विचारों से अपना दिमाग भर लिया था। कहते हैं न - "हज़ार मुहं हज़ार बातें" - शायद हरेक व्यक्ति की किसी एक घटना से जुड़े अपनी अपनी व्याख्या को ही संबोधित करता है ये वाक्य।

घटना तो सिर्फ़ ये थी की को एक ट्रक ने हलकी सी टक्कर मर दी थी, बसट्रक ड्राइवर की सच्चाई तो यही थी

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Saturday, April 11, 2009

Road Pe Raahi Bhai Bhai

Another SELP project that is already out there creating a difference is "Road Pe Raahi Bhai Bhai".
It addresses the problem of road rage and the people behind it have taken a stand to make people aware about their own role and responsibility of making our roads safer to drive on.

Visit the project's web site.

Friday, April 10, 2009

Perpetual Living - Krishan's Accomplishments

Today Krishan informs the leadership program team about his achievement - his wife and he went ahead with their friends and a group of senior citizens to discuss the possibility of making all these people pursue their hobbies and express themselves.

Krishan's efforts are very inspiring for the team and we all are charged up to accomplish similar feats in our respective projects.

Here are the pictures from the event that took place in Noida.....

Click here to see the pictures

Abundance vs Survival

I overheard these terms a few times before but had no idea of the background of it.
The other day, as my habits take me, I was just running through the pages of a book on the book stall, I found this phrase "Abundance vs Survival" again ( An omen - The Santiago in me would shout out ;-) with out even referring to Urim or Thummim ). And it forced me to search for it on the Internet.

These two are the spaces we come from in any conversation....
If we come from the space of survival for a certain thing, lets say money, our way of relating to money would be t merely survive for life long; but coming from abundance would surely give us a way of being that opens up the gates of the possibility of relating to the money without any anxiety.

For more clarity on the topic :

1. Watch this video

2. Read this blog

Tuesday, April 7, 2009

The Zone and The Optimum Level Of Anxiety

Today evening we started to work on a presentation on one concept from Buddhist texts.
This presentation would be shown to a larger gathering later.

During the discussions, we were figuring out the road map of our presentation.
Suddenly our leader for the presentation asked the team members as what is their way of relating to chanting daimoku.

For all of us its all about the faith and the prayer.
I realized there that it catapults me into the zone or the flow.

The zone or the flow is a well recognized state of mind which is self-forgetful. Being in the flow makes the excellence effortless - ever seen Sachin Tendulkar or other in form sportsman, stage performers, dancers, actors, painters, singer or even yourself fully immersed in doing something you love.

When one is in the flow, the person is enjoying life but when they are in stress or anxiety, they are a kind of barred from entering the flow.

On the lighter side, if you get the meaning of the above two paragraph, you can deduce the effect of sledging on the Indian Batsman in Australia. Sledging or verbal abuse can stress out an in form batsman and hence can force him out from his zone or flow, where the person would have performed his best otherwise.

Moreover if we see someone singing, dancing or acting in the flow - we would find that task very easy to do - we miss the state of mind of the performer here.


Being in the flow means "being cool" in all true sense.

It was also during the discussion with this leader, who herself aware of psychology intricacies, it seems, when she spoke of a word - "Optimal Anxiety".

Optimal Anxiety is the amount of anxiety that work in the favor of the beholder be it an exam or some stage performance. If anxiety levels exceed from here - it becomes panic that spoils the game.

Cool learnings....is n't it ;-)

Sunday, April 5, 2009

From Buddhism

Dr. Ikeda writes in soka family's monthly news letter: real happiness is not the absence of problems, difficulties or suffering. Here he refers to Nichiren Daishonin who has written - Difficulties are to be regarded as peace and comfort.

I opine on the above saying as: we do regard many things that are pleasant to us but unpleasant things create an inner conflict that may be very loud or subtle, but mere awareness or acceptance of such a creeping thought pattern would open up a path to getting rid of it, and from here onwards we can regard the presence of problems in life and uplift our life state to counter it.Don't we do it in sports?

-Rahul

Taj Mahal - I didn't think of you

Visited Agra this weekend, Agra is my city, but I didn't think of the Taj Mahal's existance there for even once during this whole trip!!
My stay there or on the way to Agra or while driving down from Agra to Delhi - Taj, you did not come on my radar even for a single time ( not on my radar is a new catchy phrase I have borrowed from the friends in the laedership course I am a part of, these days; A pilot has coined it - who else!).

Could also recall here while writing, I had visited the Taj for the first time in October 1986 with my father - a flock of we three brothers and two cousins, all of us following my father.

Shifting base to Agra later and further visiting Agra on official trips from CMC Ltd. makes me the second person after Shahjehan for having seen the Taj Mahal for the maximum number of times...

Thursday, April 2, 2009

ओंस में नहाई हुई घास


कभी यूँ ही सुबह उठकर देखिये, सामने के मैदान पर उगी घास;
डूबी हुई ओंस की बूंदों में सुबह सुबह;
या अपने उस क्षण में प्रातः स्नान का आनंद लेती सी;

पूर्णतः बेख़बर बाह्य परिवेश से;
जी रही है जीवन के उसी पल में;

व्याकुल है बीते समय को याद कर;
भविष्य की ही चिंता में मग्न;

नकारकर भूत या भविष्य का अस्तित्व;
प्रदर्शन कर रही है असाधारण जीवन का साक्षात्;

कभी यूँ ही सुबह उठकर देखिये, सामने के मैदान पर उगी घास;
डूबी हुई ओंस की बूंदों में सुबह सुबह;
या अपने उस क्षण में प्रातः स्नान का आनंद लेती सी;

A new story is brewing

Manish and I have been working on a single "dor" or central idea of a story. This story would be about an incident - may be an accident that occurs in a person's life. The other characters apart from the central one who meets with the accident, are going to give the story a real content. In the context of the accident, the various charaters come up with their own version of the event and relatedness....some call it an outcome of the karma created in the past, some call it the intents of the evil spirits....many people many versions for the same incident.

The idea is brewing and this weekend we are giving birth to the complete story around it.